अब राष्ट्रपति भवन में बने मुगल गार्डन को अमृत उद्यान के नाम से जाना जाएगा। अमृत उद्यान को 31 जनवरी से आम लोगों के लिए खोला जाएगा। यह गार्डन ट्यूलिप फूल की कई प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है ऐसे में यहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। 15 एकड़ में फैले हुए मुगल गार्डन यानी अमृत उद्यान का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था। यह गार्डन 15 एकड़ में फैला हुआ है। देश की राजधानी दिल्ली में रायसीना पहाड़ी को काटकर राष्ट्रपति भवन का निर्माण किया गया था। बात अगर मुगल गार्डन बनाने के पीछे के कारण की हो कहना गलत नहीं होगा कि इसका क्रेडिट अंग्रेजों को ही जाता है। जी हां मुगल गार्डन के असली रूप में आने से पहले वायसराय हाउस को एडवर्ड लुटियंस ने डिजाइन किया था। जब वायसराय हाउस का निर्माण हुआ तो उसके साथ ही एक बगीचे का निर्माण भी किया गया। हालांकि वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की पत्नी लेडी हार्डिंग को यह बगीचा पसंद नहीं आया। इसके बाद गार्डन को नया रूप देने के लिए के एक नया नक्शा तैयार किया गया और 1928 में यह बनकर तैयार हो गया। गार्डन को तैयार होने में 28 वर्षों का समय लग गया। अगर राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त कर करते हैं तो हम जान पाएंगे कि एडवर्ड लुटियंस ने गार्डन के निर्माण के समय इस्लामिक विरासत के साथ ब्रिटिश स्किल को भी ध्यान में रखा गया था। उस समय ताजमहल के बगीचे, जम्मू और कश्मीर के बाद आदि भारत और पर्शिया की पेंटिंग से प्रेरित थे। पुराने समय में मुगलों के नाम पर गार्डन के नाम रखने का चलन था। यही कारण था कि उसी विरासत को ध्यान में रखते हुए इस गार्डन को मुगल गार्डन का नाम दिया गया। मुगल गार्डन के विषय में एक खास बात यह है कि इसे पहले आम लोगों के लिए नहीं खोला गया था। इसमें आम लोगों को एंट्री नहीं दी जाती थी। लेकिन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इसे हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद से ही यह फरवरी और मार्च में इसे आम लोगों के लिए खोला जाता है।