सच खबर, मेदिनीनगरः रमजान उल मुबारक मुसलमानो का सबसे अफजल और पाकिजगी का महिना है। रमजान के रोजे बुराइयों से दूर रखता है। रोज़ा रखने से इंसान के अंदर तकवा और पारहेजगारी आती है। मुस्लिम समाज के लोग रमजान के माह में पांचो वक़्त की नमाज़ वक़्त के साथ अदा करते है और वक़्त पे नमाज़ के पाबंद हो जाते है। जिले का मुख्यालय मेदिनीनगर शहर के कई मस्जिदों में 14वीं रमजान (15वीं शब) को खत्म-ए-कुरान (तरवीह) की गयी। छः मुहान स्थित जामा मस्जिद, मेन बाजार स्थित चौक बाजार मस्जिद और पहाड़ी मुहल्ला स्थित नूरी मस्जिद में कुरान-ए-पाक मुकम्मल हुई है। जामा मस्जिद में इमाम मुफ्ती मो. शाहनवाज कासमी, चौक बाजार मस्जिद में जुबेर अख्तर बरकाती और नूरी मस्जिद में हाफिज गुफ़रान तरवीह पढाये। जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मो. शाहनवाज कासमी ने बताया कि रमजान के रोजा रखने की बहुत ताकिद आई है। इस लिए रमजान का एक भी रोजा बगैर किसी मजबुरी के न छूटे। चुके रमजान के एक रोजे की कजा बाद में एक रोजा रख लेने से अदा हो जायेगी लेकिन रमजान के रोजे की फज़िलत, अद्रो मंजिलत ऐसी है की पूरी जिंदगी रोजे रखे तब भी रमजान के एक रोजे की फज़िलत नहीं पा सकता है।
उन्होंने कहा की तरवीह पढ़ने का भी बहुत बड़ा सवाब है। तरावीह सुन्नते मोअक्कदा है। मर्द और औरत दोनो के लिए जरूरी है। रोजा और तरवीह (कुरान) अल्लाह के पास सिफारिश करेगा और अल्लाह उसकी सिफारिश सुनेगा और बंदे का गुनाह को माफ करेगा।