सच खबर, छत्तीसगढ़ः निवेशकों के हित को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और वित्तीय संस्थाओं को घेर लिया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अडानी मुद्दे पर भारतीय स्टेट बैंक और एलआईसी की मुख्य शाखाओं के सामने प्रदर्शन किये हैं। रायपुर में प्रदर्शन के दौरान एसबीआई एंड एलआईसी की तख्ती लगाए प्रदर्शनकारी, गौतम अडानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का मुखौटा लगाए व्यक्तियों के कदमों में लोटते दिखाए गए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम की अगुवाई में मुख्य प्रदर्शन राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चैक स्थित भारतीय स्टेट एसबीआई एंड एलआईसी की मुख्य शाखा के बाहर हुआ। इस प्रदर्शन में वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, विधायक विकास उपाध्याय, कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर, नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे सहित प्रमुख पदाधिकारी और नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जय स्तंभ चैराहे पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया। उसके बाद सभी नेता बैंक के सामने सड़क पर बैठ गए। इस दौरान वित्तीय संस्थाओं के अडानी-मोदी के चरणों में लोट जाने को नुक्कड़ नाटक के जरिये दिखाया गया। दो प्रदर्शनकारियों ने गौतम अडानी और नरेंद्र मोदी का मुखौटा लगाया। वहीं दो लोग एसबीआई एंड एलआईसी के नाम की तख्ती गले में लटकाकर बैठ गये। करीब आधे घंटे की नारेबाजी और नुक्कड़ नाटक के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौटे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम का कहना था, शेयर बाजार में तेज गिरावट ने मोदी सरकार और कुछ कॉर्पोरेट घरानों के बीच के अवैध गठजोड़ को सार्वजनिक कर दिया है। इतना सब होने के बाद भी सरकार निवेशकों को सुरक्षित रखने के लिए किसी तरह की जांच और कार्रवाई से बच रही है। इसकी वजह से पूरा मध्यम वर्ग चिंतित है। केंद्र सरकार द्वारा अडानी समूह में एसबीआई एंड एलआईसी जैसे सरकारी वित्तीय-बैंकिंग संस्थानों के बेहद जोखिम भरे निवेश ने एलआईसी के 29 करोड़ पॉलिसी धारकों और एसबीआई के 45 करोड़ खाता धारकों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। केंद्र सरकार जांच भी नहीं करा रही है और संसद में चर्चा से भी भाग रही है। यह निवेशकों को और अंधेरे में डालने वाली बात होगी। इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने दो प्रमुख मांग उठाई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, हमारी मांग है कि हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में उठे सवालों की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अथवा संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराई जाए। हमारी दूसरी मांग है कि एसबीआई सहित अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों के अविवेकपूर्ण निवेश पर संसद में चर्चा कराई जाए। निवेशकों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। एक अमेरिकी कंपनी है हिंडनबर्ग रिसर्च। यह इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव मार्केट के आंकड़ों का विश्लेषण करती है। इसे कॉरपोरेट जगत की गतिविधियों के बारे में खुलासा करने के लिए जाना जाता है। कंपनी यह पता लगती है कि क्या शेयर मार्केट में कहीं गलत तरीके से पैसों की हेराफेरी तो नहीं हो रही है। कोई कंपनी अकाउंट मिसमैनेजमेंट कर खुद को बड़ा तो नहीं दिखा रही है। कोई कंपनी शेयर मार्केट में अपने फायदे के लिए गलत तरीके से दूसरी कंपनियों के शेयर को बेट लगाकर नुकसान तो नहीं पहुंचा रही है। 24 जनवरी को हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर 32 हजार शब्दों की एक रिपोर्ट जारी की। इसमें 88 सवाल भी शामिल किये थे। इसमें दावा किया गया, अडानी समूह दशकों से शेयरों के हेरफेर और अकाउंट की धोखाधड़ी में शामिल है।