सच खबर, मेदिनीनगरः झामुमो के सचिव सन्नू सिद्धिकी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पांकी विधायक शशि भूषण मेहता पर हमला बोला। विधानसभा में शशि भूषण मेहता ने पांकी दंगा पर बोलते हुए मस्जिद की जांच कराने बोला था। कई लोगों का मानना है कि ये असंवेदनशील बयान है। सन्नू सिद्दिकी के कहा कि शशि भूषण मेहता जी मानसिक रूप से बीमार हो गए हैं। इनकी सोची समझी साजिश नाकाम हो गई है। गंगा-जमुनी तहजीब को तोड़ने का षड्यंत्र नाकाम हुआ, जिसकी वजह से बौखला कर ये उलुल-जुलूल बयान दे रहे है। पांकी विधायक की नियत में खोट है, जिस तरह से उन्होंने विधानसभा को गुमराह करने की कोशिश की हैं । इससे साफ पता चलता है की समाज को बांट कर उसका राजनीतिकरण करने का प्रयास लगातार मेहता कर रहे हैं। पहले तो कयास लगाए जा रहे थ,े लेकिन ये साफ पता चलता है की ये अब अगले चुनाव को जितने के लिए भाजपा के हिंदू मुस्लिम फॉर्मूले पर काम करने लगे हैं। मेहता जी अगर अब तक विकास किए होते तो शायद उन्हें ये दिन नहीं देखना पड़ता। मस्जिद के दरवाजे खुले हैं मेहता जी किसी भी मस्जिद में जाएं और घूम कर खुद देख सकते हैं। धर्म स्थलों को बदनाम करने की घटिया हरकत करने से उन्हें बचना चहिए। अगले चुनाव में उन्हें जनता जवाब देने वाली है। उन्हें विधायक विकास कार्यों के लिए चुना गया था; ना की ऐसे उलूल- जुलुल बयान देने के लिए। पांकी का भाईचारा टूटने वाला नहीं है, उन्हें तत्काल माफी मांगना चाहिए। जनप्रतिनिधि का कर्तव्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना भी होता है, संविधान की कसम खाने वाले जनप्रतिनिधि को नहीं भूलना चाहिए कि देश संविधान से चलता है, नागपुर वाले मानसिकता से नहीं। ये नीलांबर-पीताम्बर की धरती है, इस मिट्टी खुशबू बसी है हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाइयों की। इसमें से एक भी हटा तो हिंदुस्तान की तहजीब और संस्कृति नहीं बचेगी। हमारे देश की मानसिकता जोड़ने की है तोड़ने की नहीं। आज पांकी शिक्षा, स्वास्थ्य में पिछड़ते जा रहा है लेकिन विधायक होने के नाते क्षेत्र पर ध्यान देने के जगह अब ये लोगों को लड़वाने के काम लग गए हैं। इन्हें पता है की आने वाला चुनाव ये बुरे तरीके से हारने वाले हैं, ऐसे में मेहता जी हताश हो कर बयान दे रहे हैं।