सरकार ने निर्णय नहीं लिया तो सभी जिलों में होगा जोरदार आंदोलनः बीनू सिंह

सच खबर, हुसैनाबादः हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र समेत राज्य में बालू की किल्लत को लेकर विकास कार्य प्रभावित है।मजदूर पलायन को बजबूर है। इस समस्या को लेकर इंटक के प्रदेश प्रदेश महासचिव विनय कुमार सिंह उर्फ बीनू सिंह ने हुसैनाबाद अनुमंडल मैदान से जनाक्रोश ट्रैक्टर बाइक रैली का आयोजन किया। दो किलोमीटर में बाइक चार पहिया व ट्रैक्टर कतार में दिखा। बाड़ेपुर उच्च विद्यालय के मैदान में एक दिवसीय धरना दिया गया। धरना के बाद अनुमंडल पदाधिकारी हुसैनाबाद के मध्यम से मुख्यमंत्री, राज्यपाल व स्थानीय विधायक कमलेश कुमार सिंह के नाम ज्ञापन सौंपा गया। रैली अनुमंडल मैदान से निकलकर देवरी रोड, दंगवार रोड होते बड़ेपुर मैदान पनुंची। बाडेपुर मैदान में सभा को संबोधित करते हुए इंटक के प्रदेश महासचिव विनय कुमार सिंह उर्फ बीनू सिंह ने कहा कि बालू को लेकर लगातार दो वर्षाे से हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र सहित सम्पूर्ण राज्य में भवन निर्माण व विकास कार्य प्रभावित है। लगातार ध्यान आकृष्ट कराने के बावजूद सरकार मूक दर्शक बनी है। अब जनता, मजदूर, गाड़ी मालिक, दुकानदार सभी के सब्र का बांध टूट चुका है। इसी का परिणाम रैली में नजर आया। उन्होंने कहा कि सरकार के मुखिया बालू का अवैध कारोबार अपने अधिकारियों के मध्यम कराकर सरकारी खजाने में सेंध लगा रहे हैं। यह जनता के साथ बड़ा धोखा है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं करने के पीछे बड़ा खेल चल रहा है। बालू घाटों की बंदोबस्ती होने से सरकार को राजस्व भी मिलेगा और आम लोगों को बालू आसानी से सस्ती दर पर उपलब्ध होगा। झारखंड में भवन निर्माण, सड़क, पीएम आवास समेत सभी विकास के कार्य ठप्प हैं। उन्होंने कहा कि बहुत याचना कर चुके, अब रण के लिए जनता सड़क पर उतरने को बाध्य है। सरकार अब नहीं चेती तो झारखंड के सभी जिले में जनता सड़क पर उतरेगी। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है। उन्होंने कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में निजी निर्माण कार्य के साथ साथ सरकारी योजनाएं भी आधर में लटकी है।उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र भवन, सड़क निर्माण करना मुश्किल हो गया है। बालू के अभाव में वह कार्य नहीं करा पा रहे है। उन्होंने कहा कि बालू के अभाव में विकास कार्य ठप्प हो जाने से राज मिस्त्री, मजदूर और अन्य कारीगरों का पलायन दूसरे राज्यों में होने लगा है। सीमेंट, ईंट,छड़ का व्यवसाय करने वाले लोगों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। सरकार रोजगार देने में विफल है। जिनके पास रोजगार की व्यवस्था थी,उनका रोजगार भी बालू के अभाव में ठप्प है।

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