ख्वाब बुनने हेतू भी समाज की संरचनाओं को समझना जरूरी हैः प्रेम प्रकाष

सच खबर, मेदिनीनगरः सामाजिक सरोकारों से जुड़े फिल्मकार, निर्देशक व लेखक सत्यजीत रे की स्मृति दिवस के मौके पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की पलामू इकाई द्वारा मेदनीनगर के रेडमा स्थित इप्टा कार्यालय में सांस्कृतिक पाठशाला प्रारंभ किया गया। यह सांस्कृतिक पाठशाला प्रति रविवार को संध्या 6ः00 बजे से 7-00 बजे तक संचालित की जाएगी। पाठशाला में बतौर अतिथि राजस्थान के लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन लोबो एवं वरिष्ठ पत्रकार व लेखक तरुण कांति बोस उपस्थित थे। सांस्कृतिक पाठशाला वरिष्ठ कलाकार प्रेम भसीन और वरिष्ठ अधिवक्ता व संस्कृतिकर्मी नंदलाल सिंह की संयुक्त अध्यक्षता में प्रारंभ की गई। जिस का संचालन प्रेम प्रकाश कर रहे थे। प्रेम भसीन ने सत्यजीत रे को याद करते हुए कहा कि सत्यजीत राय रे का संबंध पलामू से रहा है। फिल्म निर्माण के दौरान जब पलामू आए थे तो उनसे मिलने का मौका भी मिला। उनकी कई चर्चित फिल्में रही है, जिनमें शतरंज के खिलाड़ी और अरण्य रात्रि काफी लोकप्रिय रही। इसके बाद पाठशाला की प्रक्रिया की शुरुआत एक मनोवैज्ञानिक गेम से हुई। पाठशाला शुरू करने के पहले कार्यालय के फर्श पर एक काली चादर फैलाई हुई थी। उस चादर के नीचे कई सामान रखे थे। पाठशाला के प्रारंभ में प्रेम प्रकाश ने पाठशाला के उद्देश्य को रखते हुए कहा कि समाज की संरचना को समझे बगैर वर्तमान समय की कहानी, नाटक, गीत-ग़ज़ल, आलेख और राजनीतिक घटनाओं और परिघटनाओं को नहीं समझ सकते। जरूरी है समाज की संरचनाओं को समझना। साथ ही सुंदर दुनिया के निर्माण के लिए ख्वाब बुनने हेतू भी समाज की संरचनाओं को समझना जरूरी है। विषय प्रवेश के बाद पाठशाला में उपस्थित तमाम लोगों को यह कहा गया कि इस काली चादर के नीचे कुछ सामान है। चादर हम 30 सेकंड के लिए उठा रहे हैं।

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