वन अधिकार पट्टा वितरण से पूर्व हो समुचित जांच – उपायुक्त कंचन सिंह

जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक में 19 सामुदायिक वन पट्टा दावों की की गई समीक्षा

सिमडेगा।
वन अधिकार अधिनियम 2006 (Forest Rights Act) के तहत अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वनवासियों को अधिकार देने की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने हेतु सिमडेगा जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। इसी क्रम में उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई।

बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री शशांक शेखर सिंह, उप विकास आयुक्त श्री दीपांकर चौधरी, परियोजना निदेशक आईटीडीए श्रीमती सरोज तिर्की, जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती रोस प्रतिमा सोरेंग, जिला परिषद सदस्य श्रीमती शांति बाला केरकेट्टा, अजय एक्का सहित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

19 सामुदायिक दावों की गहन समीक्षा

बैठक में जिले के विभिन्न प्रखंडों से प्राप्त कुल 19 सामुदायिक वन अधिकार पट्टा (CFR) के दावों की समीक्षा की गई। समिति ने प्रत्येक आवेदन के भू-सीमा निर्धारण, दस्तावेजों की वैधता और फील्ड सत्यापन की विस्तृत जांच की। कई दावों में नजरी नक्शा, प्लॉट संख्या, भूमि की प्रकृति (वन भूमि या राजस्व भूमि) तथा संलग्न दस्तावेजों का मिलान कर आवश्यक निर्देश दिए गए।

“पात्र को ही अधिकार, जांच हो चेकलिस्ट के आधार पर” – उपायुक्त

उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि,

“वन अधिकार पट्टा निर्गत करने से पूर्व प्रत्येक दावे की जांच निर्धारित चेकलिस्ट के अनुसार अनिवार्य रूप से की जाए। फील्ड स्तर की रिपोर्टिंग, दस्तावेजों की पुष्टि और राजस्व-अभिलेखों की सुस्पष्टता के आधार पर ही निर्णय लिए जाएं।”

उन्होंने यह भी कहा कि “त्रुटिपूर्ण आवेदनों को सुधारने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए” और समिति का कार्य पारदर्शिता, निष्पक्षता और सामूहिक निर्णय पर आधारित हो।

समिति को दिए गए निर्देश

  • प्रत्येक आवेदन का क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं सत्यापन अनिवार्य
  • वन भूमि की वास्तविक स्थिति का आंकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें
  • दस्तावेजी खामियों को चिन्हित कर जल्द से जल्द दुरुस्त करें
  • पात्रता की पुष्टि के बाद ही पट्टा निर्गत किया जाए
  • प्रक्रिया में संबंधित ग्रामसभा की भूमिका को प्राथमिकता दी जाए

समापन में हुआ सर्वसम्मति पर जोर

बैठक के समापन पर उपायुक्त ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम जनजातीय अधिकारों की बहाली का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, अतः इसके तहत मिलने वाले पट्टों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को परस्पर समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।

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