सच खबर, मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत सदर प्रखंड के सुआ पंचायत स्थित बिंदूआ टोला में दो बच्चों के साथ होते अमानवीय व्यवहार को जानकर किसी का कलेजा फट पड़ेगा, जिन्हें स्वस्थ करने के लिए इंडियन रोटी बैंक हरसंभव मदद के लिए तैयार है। जंजीर से मुक्त करने के लिए प्रशासन को इनकी सुध लेनी चाहिए। ये कहना है इंडियन रोटी बैंक के प्रदेश संयोजक दीपक तिवारी का। जिन्होंने मीडिया में आई खबर को देख दूसरे दिन सुबह सवेरे इंडियन रोटी बैंक की टीम सेवा करने पहुंची। जहां पलामू के उपायुक्त एवं सिविल सर्जन को इनके इलाज एवं जंजीर से मुक्ति के लिए पहल करने की मांग की। मेदिनीनगर से सटे महज दस किलोमीटर दूर सुआ पंचायत सेवादार दीपक तिवारी के नेतृत्व में आईआरबी की संजीवनी टीम मेडिकल सुविधा के साथ पहुंची। जहां आदिम जनजाति के परहिया बच्चों को जंजीर में बांधकर पिछले दस सालों से रखा जाता है। उनकी हालत देख उनकी चिकित्सक डॉ अमित मिश्रा से स्वास्थ्य एवं मानसिक जांच करायी। साथ ही छः महीने का राशन में चावल, दाल, आटा, तेल, चीनी, नमक, आलू, कपड़े, बिछावन मुहैया कराया। मौके पर दीपक तिवारी ने कहा कि इंडियन रोटी बैंक की स्थापना का उद्देश्य आज सफल हुआ, जब दो परहिया बच्चों को जंजीर से मुक्ति दिलाने का जिम्मा उठाया गया। दस सालों से बंधे बच्चे मानव जीवन के बजाय जानवर की जिंदगी जीने को विवश हैं। आज मुकेश, आशीष जैसे दो भाइयों का हाल देखकर सेवा के संकल्प को मजबूती मिली। इंडियन रोटी बैंक का उद्देश्य सफल हो गया । डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि दोनों बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। बचपन से इन्हें बांधकर रखा गया, जिसके चलते इनका बौद्धिक विकास नहीं हो पाया है। इन्हें जरूरत की दवाएं बैंक की ओर से उपलब्ध करवाई गई है। आने वाले दो तीन साल में ये पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे। वहीं, सदर थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि बच्चों को देख मोह आता है, इन्हें प्यार की जरूरत है। अपने पिता की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर इन बच्चों का सेवा करके अच्छा लगा। इस अभियान में इंडियन रोटी बैंक के साथ स्थानीय पत्रकारों की भूमिका अहम रही। वहीं कौड़िया मुखिया प्रतिनिधि प्रेम प्रकाश ठाकुर, इंडियन रोटी बैंक के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य साहेब सिंह नामधारी, वाइस स्टेट कॉर्डिनेटर परवेज अख्तर, पलामू कॉर्डिनेटर मनीष यादव, वाइस कॉर्डिनेटर राकेश कुमार, रविरंजन सिंह ने परिवार की देखभाल एवं बच्चों को स्वस्थ करने का संकल्प दुहराया एवं हमेशा आकर देख-रेख करने का भरोसा दिया।