फैज अहमद फैज की जयंती पर इप्टा कार्यालय में ‘लाजमि है कि हम भी देखेंगे’ कार्यक्रम का आयोजन

सच खबर, मेदिनीनगरः स्वतंत्रता समता न्याय और बंधुत्व के रास्तेध्आओ कि कोई ख्वाब बुने कल के वास्ते की भावना के साथ 15वां इप्टा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजन समिति एवं प्रगतिशील लेखक संघ पलामू के द्वारा फैज अहमद फैज की जयंती के मौके पर रेड़मा स्थित इप्टा कार्यालय में ‘ लाज़िम है कि हम भी देखेंगे’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉक्टर इंतखाब असर ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के संघर्ष में जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि फैज साहब ने अपनी रचनात्मकता जरूरतमंद लोगों और एक सुंदर दुनिया के निर्माण के लिए समर्पित किया था।
इसके बाद अरशद जमाल उर्फ गुड्डू ने फैज अहमद फैज की रचना ‘लाज़िम है कि हम भी देखेंगे’ , विकास कुमार पप्पू ने ‘आज के नाम और आज के गम के नाम’ तथा गोपाल सिंह ने ‘अब चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले’ृ की संगीतमय प्रस्तुति किया। क्रम को आगे बढ़ाते हुए युवा शायर एमजे अजहर ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब को मानवीय मूल्य की हिफाजत करने वाले शायरों में अजीम शायर बताया। साथ ही उन्होंने उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए दो गजल प्रस्तुत किए। गजल के माध्यम से उन्होंने कहा कि-
रखूं उम्मीद अब इंसाफ की क्या
अदालत जिसकी है का़तिल वही है
इसके बाद लोकप्रिय कवि अरविंद सिन्हा ने अपनी तीन क्षणिकाएं प्रस्तुत कर फैज अहमद फैज के प्रति सम्मान प्रकट किया। अपनी एक क्षणिका के माध्यम से उन्होंने कहा कि –
एक कुत्ते ने
दूसरे कुत्ते से कहा
यार भौंकना क्यों छोड़ दिया
कुत्ता बोला
क्या करुं यार
भौंकने का अर्थ ही
अब भाषण हो गया।
इसके बाद लोकप्रिय शायर नौशाद अहमद ने फैज अहमद फैज के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि फैज साहब की तुलना यदि हम किसी भी भाषा के बड़े शायरों के साथ या कवियों के साथ करते हैं तो पाते हैं कि दुनिया के किसी भी शायर से कम नहीं। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की प्रतिबद्धता उनकी रचनाओं में देखने को मिलती है। ष्

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