कवि स्पर्श द्वारा आयोजित ‘होली मिलन कवि सम्मेलन’ में बही कविता की बयार

सच खबर, औरंगाबादः होलिका दहन की पूर्व संध्या पर कवियों के लिए समर्पित संस्था कवि स्पर्श द्वारा ऑनलाइन अखिल भारतीय होली कवि सम्मेलन आयोजित किया गया,जिसमें कविता की बयार बही।कवि सम्मेलन का उद्घाटन वरीय साहित्यकार एवं हिन्दी दैनिक ष्दस्तक प्रभातष्के प्रधान संपादक प्रभात वर्मा द्वारा किया गया।
हिन्दी साहित्य के जाने माने साहित्यकार एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरविन्द अकेला एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जोहार वनांचल के निदेशक आकाश कुमार सिंह की गरिमामई उपस्थिति, वरीय कवि राजेश तिवारी मक्खन (झांसी)की अध्यक्षता एवं कवि स्पर्श के सर्वेसर्वा एवं कवि सम्मेलन के मंच संचालक राम राय के कुशल संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत वरीय कवियित्री गीता पाण्डेय अपराजिता (रायबरेली) ने अपनी सरस्वती वंदना से की। जाने माने कवि एवं मंच संचालक श्री राम राय के कुशल संयोजन में आयोजित इस अखिल भारतीय होली कवि सम्मेलन में सुषमा सिंह(औरंगाबाद),अमिता मिश्रा,उषा श्रीवास वत्स,अमित कुमार द्विवेदी(रीवा),राम कुमार प्रजापति(अलवर),हीरा सिंह कौशल,नीलम पाण्डेय(गोरखपुर ),भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’ (झाबुआ),सुधीर श्रीवास्तव(गोण्डा),खेमराज साहू ‘राजन’(दुर्ग), श्वेता कनौजिया(गौतम बुद्ध नगर),जितेन्द्र परमार ष्जीतष्,कल्पना सेठी कला(नागपुर), रंजना बिनानी काव्या (गोलाघाट),शाहाना परवीन ‘शान’ (पटियाला),शीला सिंह (बिलासपुर),रेनू कुमारी (गुरुग्राम),राजेश तिवारी ‘मक्खन’(झांसी)रमा बहेड(हैदराबाद),ललिता कुमारी वर्मा अविरल, बृंदावन राय सरल (सागर),अन्नपूर्णा तिवारी,रविबाला ठाकुर, निर्मल जैन श्नीरश्,सोनु सिंह,शारदा प्रसाद दुबे, शरद चंद्र(थाने),मुस्कान केशरी(मुजफ्फरपुर),विनीत शूरवीर(अम्बेडकर नगर)डॉ. कलावती कर्वा ष्षोडशकलाष्(कूचबिहार),सच्चिदानंद तिवारी,शलभ,ममता उपाध्याय(वाराणसी),
डॉ सत्य प्रकाश, ( वाराणसी),डा. दक्षा एच निमावत ‘पृथा’ (गांधीनगर),सीता देवी राठी(कुच बिहार),डा. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश(वाराणसी), सनुक लाल यादव (बालाघाट),नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर,ईश्वर चंद्र जायसवाल(संत कबीर नगर),डॉ.गीता पांडे अपराजिता(रायबरेली), निवेदिता सिन्हा (भागलपुर),चंद्रप्रकाश गुप्त ‘चंद्र’(अहमदाबाद), आशी प्रतिभा (ग्वालियर)एवं डा दक्षा एच निमावत पृथा (गांधीनगर)सहित चार दर्जन कवियों एवं कवियित्रियों ने अपनी अपनी रचनाओं से संपूर्ण वातावरण को होलीमय एवं काव्यमय बना दिया।

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