सच खबर, मेदिनीनगरः इप्टा के 15वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सांस्कृतिक संध्या के दौरान दिखा भारत की बहुलतावादी संस्कृति का स्वरूप। नीलाम्बर-पीताम्बर लोकरंग महोत्सव में तेलंगाना, बिहार, केरला, बंगाल, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की प्रस्तुतियों के साथ हुए लोकरंग के दर्शन। बिहार इप्टा के कलाकारों ने संगीत निर्देशक सीताराम सिंह के नेतृत्व में सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत करते हुए ‘इप्टा से जुड़े कलाकारों की फिल्मी दुनिया में धमक की गूंज’ थीम पर आवाम से जुड़े ‘साथी हांथ बढ़ाना, इंसान का इंसान से हो भाईचारा-यही पैगाम हमारा’ आदि फिल्मी जनगीतों की सामूहिक प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में तेलंगाना इप्टा ने पल्ले नरसिंम्हा के नेत्रत्व में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के यंत्रों के साथ लोकगीतों की धमाकेदार प्रस्तुति दी। खास बात यह थी कि भाषा से अपरिचित होते हुए भी स्रोता झूमने और थिरकने लगे। यही माहौल केरला, बंगाल, आंध्रप्रदेश इप्टा की प्रस्तुति के दौरान देखने को मिला कि मलयाली भाषा में लोकगीत होने के बावजूद हिंदी भाषी दर्शक झूमते रहे। पूरे सांस्कृतिक आयोजन में भाषा की रूकावट कहीं देखने को नहीं मिली। केरला इप्टा के कलाकारों ने मंच पर गमछे के माध्यम से आकृतियां रचते हुए लोकगीत की कहानी को व्यक्त किया। आयोजन समिति के महासचिव शैलेन्द्र कुमार ने इसे व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा देश बहुलतावादी संस्कृति का देश है और इप्टा का मंच देश की इसी मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ इप्टा के कलाकारों ने रोशन घड़ेकर के निर्देशन में करमा लोकनृत्य और डंडा लोकनृत्य के कंपोजीशन को प्रस्तुत किया। बिहार इप्टा द्वारा श्वेता भारती के निर्देशन में गोदना लोकनृत्य की भावभीनी प्रस्तुति दी गई। पंजाब इप्टा के साथियों ने किसानों के समर्थन में पंजाबी भाषा में शौर्य से भरे जनगीतों की प्रस्तुति दी।