आज समाप्त हुआ नगर निगम का कार्यकाल,अधिकार अब जिला प्रषासन के हाथों मेंईष्वरी बाबू, हरखचंद और उमा बाबू जैसे चैयरमैन की हुई अनदेखी

मेदिनीनगरः सच खबर, झारखंड के कुल नौ नगर निगम के अलावे यहां कुल 34 नगर निकायों का कार्यकाल आज समाप्त हो गया है। झारखंड के कैबिनेट के द्वारा इनकी सेवा विस्तार देने से इंकार के साथ ही; इनकी जिम्मेदारी जिला प्रसासन के हाथो में आ गई है। इन इकाईयों के चुनाव पर असमंजस की स्थिति के साथ ही झारखंड के कुल नगर पंचायत, नगर परिषद और निगम के चुनावांे की फिलहाल संभावना भी नहीं दिख रही है। मेदिनीनगर नगर निगम की चर्चा करंे तो वर्तमान में इसमें 35 वार्ड हैं, जिसमें 14 पुरुष वार्ड पार्षद और 21 महिला पार्षद हैं। वार्ड नंबर-नौ , चार, छह, सात,आठ,बारह, तेरह, सत्रह, अट्ठारह, बीस, बाईस, तेईस , उनतीस , तीस मंे पुरुष पार्षद हैं। बाकी वार्ड की पार्षद महिलाए हैं । यदि विकास की बात करें तो कुछ वार्ड को छोड़ दिया जाय, तो कहीं मध्यम और किसी वार्ड में अच्छे विकास कार्य किए गए हैं । मेदिनीनगर नगर निगम पूर्व में डालटनगंज नगर पालिका कहलाती थी। इसकी स्थापना एक जुलाई 1888 में हुई थी। 1900 ई. में बोर्ड की स्थापना हुई। विधिवत गठन 6 मई 1924 को हुआ था। 1900 से 1941 तक म्यूनिसिपल बोर्ड के चेयरमैन अग्रेंज कमिश्नर हुआ करते थे जो आइसीएस थे । प्रथम चेयरमैन आइसीएस .स्ण्ैण्ै व्ष्ड।स्स्म्ल् (1900-1913) तक रहे थे ।
द्वितीय चेयरमैन आइसीएस च्ब्ण् ब्जंससमदजे(1913-1920)तक हुए थें। अग्रेंज सरकार ने डालनगंज म्यूनिसिपल के लिए 1991में 22 नवम्बर को पत्रांक 3214 प्ब्ै के तहत चुनाव की अधिसूचना जारी की और इस चुनाव कराने के लिए बिहार सरकार ने स्व. राय बहादुर उमाकांत प्रसाद, लाल कोठा, थाना रोड, और स्व. बाबू नारायण राम पासी को चुनाव कमिश्नर बनाया गया था। इस प्रकार नगर पालिका के प्रथम निर्वाचित चेयरमैन 1941 से 1948 ई. तक के लिए स्व. बाबू ईश्वरी प्रसाद,लाल कोठा, थाना रोड चुने गए और उप चैयरमैन 1941 के कार्यकाल में स्व. गिरिजा शरण सिंह चुने गए थे। ये दोनों लगातार दो कार्यकाल तक रहे। उस वक्त नगरपालिका का चुनाव चार वर्षो के लिए हुआ करता था। तृतीय नगर पालिका के चुनाव 1949 से पाँच वर्ष के लिए चेयरमैन स्व. हरख चन्द्र जैन और वे ही चतुर्थ कार्य काल 1953-1956 के लिए चुने गए थे, लेकिन अपने द्वितीय कार्यकाल की अवधि पूरा होने के पूर्व एक वर्ष पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त द्वितीय चैयरमैन प्रथम बाद स्व. नर्वेदेश्वर सिंह उर्फ नरू सिंह चुने गए थे। हरखचंद्र जैन के इस्तीफे के साथ ही 1955 ई. में नगर पालिका के पाँचवें कार्यकाल के लिए चुनाव हुए, जिसमें चैयरमैन स्व. राय साहब उमाकांत प्रसाद( लाल कोठा, थाना रोड) एवं उप चैयरमेन स्व. नर्वेदेश्वर सिंह उर्फ नरू सिंह चुने गए। ये दोनों के नगरपालिका के लगातार दो कार्यकाल अर्थात 19 65 तक दोबारा चुने गए। नगर पालिका के साँतवें कार्यकाल के लिए 1965 के चुनाव में प्रथम बार चैयर मैन बनने का सौभाग्य स्व. नर्वदेश्वर सिंह उर्फ नरू बाबू चुने गए, जो लगातार 1996 तक रहे। स्व. नर्वदेश्वर सिंह की अस्वस्थता के कारण नगर पालिका के अधिनियम 25 के तहत चैयरमैन का अधिकार उनके पुत्र सुरेन्द्र सिंह को दिया गया। सुरेन्द्र सिंह का कार्यकाल 1996 से 1998 तक रहा। इसके बाद के कार्यकाल के लिए सुरेन्द्र सिंह पुनः चैयरमैन चुने गए और लगातार 1913 तक रहे। इनके कार्यकाल में ही नगर पालिका का विस्तार हुआ और यह नगर परिषद बना। नगर परिषद के चुनाव में 2013 से 2018 के लिए श्रीमती पूनम सिंह चुनी गई। उप चैयरमैन मनोज सिंह निर्वाचित हुए  थे। 2018 के चुनाव में झारखंड सरकार ने मेदिनीनगर नगर परिषद को विस्तार देेते हुए नगर निगम बनाया गया और चुनाव में प्रथम मेयर श्रीमती अरूणा शंकर और उप मेयर राकेश कुमार सिंह उर्फ मंगल सिंह चुने गए थे। इस प्रकार वर्तमान नगर निगम अपने कई पड़ाव और चुनावों को पार करते हुए प्रथम और द्वितीय कार्यकाल स्व. ईश्वरी प्रसाद, तृतीय और चतुर्थ कार्यकाल हरखचंद जैन , पाँचवें और छठे कार्यकाल स्व. राय साहब उमाकांत प्रसाद, सातवां कार्यकाल नर्वर्देश्वर सिंह जैसे कई प्रबुद्ध और विद्वान चैयरमैन को देखा है।वर्तमान में सुरेन्द्र ंिसंह जो लंबी अवधि तक नगर परिषद की सेवा करते रहे। इनके कार्यकाल भी काफी सराहनीय रहा है। श्रीमतीउ पूनम सिंह ने भी चैयरमैन बनकर कई कार्य किया है। उप चैयरमेन मनोज सिंह के कार्यकाल को भी निगमवासी सराहते हैं। मेयर बनने के बाद श्रीमती अरूणा शंकर और उप मेयर राकेश सिंह उर्फ मंगल सिंह ने निगम की धरती की दशा और दिशा दोनों बदल दिया है। कई विकास कार्य किए गए, जिन्हें जनता ने देखा और सराहा है। इन दोनों के कार्यकाल में जितने चौक-चौराहों, सड़कों का नामाकरण किया। कहीं वह राजनीति प्रेरित न बन जाये । कमी तो रह गई,वैधानिक दस्तावेज रहते हुए भी नगर पालिका के प्रथम चैयरमैन स्व. बाबू ईश्वरी प्रसाद, द्वितीय चैयरमैन हरखचंद जैन, तृतीय चैयरमैन बाबू उमाकांत प्रसाद की किसी चौक -चौराहे पर प्रतिमा न लगी न किसी सड़क का नाम ही इनके नाम पर रखा गया है। इसका एक और कारण यह भी हो सकता है कि जैन समाज का वोट बैंक कम है। कायस्थ समाज से वोट  बैंक भी थोड़ा कम है, लेकिन किसी भी चुनाव में उलट फेर करने के लिए सक्षम है।

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