जब भी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष की बात होगी तो उसका सही रास्ता मार्क्सवाद ही बताएगाः नंदलाल सिंह

सच खबर, मेदिनीनगरः महात्मा बुद्ध और महान दार्शनिक कार्ल मार्क्स की जयंती के मौके पर इप्टा पलामू के द्वारा ‘कितना प्रासंगिक हैं मार्क्सवाद’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में गोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं अधिवक्ता नंदलाल सिंह तथा वरिष्ठ चिंतक शब्बीर अहमद उपस्थित थे। गोष्ठी की शुरुआत अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष केडी सिंह की अध्यक्षता में प्रारंभ हुई। केडी सिंह ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि 5 मई खासकर वर्ष 2023 के लिए काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि 5 मई के दिन दो महापुरुषों महात्मा बुद्ध और महान दार्शनिक कार्ल मार्क्स का जन्म हुआ था। जब चारों तरफ यह कहा जा रहा हो कि मार्क्सवाद का अंत हो गया है तो ऐसे में आज की गोष्ठी का विषय कितना प्रासंगिक है मार्क्सवाद काफी महत्व रखता है, क्योंकि यह भी सत्य है कि मार्क्सवाद के बिना सुंदर दुनिया का निर्माण संभव नहीं। आज तमाम पॉलिटिकल पार्टियों के मुद्दे में रोजी और रोटी का सवाल निहित है। यह बात दीगर है कि पॉलिटिकल पार्टियां इन सवालों से परे हटकर कार्य कर रही है, लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए तमाम पार्टियों को रोजी और रोटी की बात करनी होती है।
विषय प्रवेश के बाद मुख्य वक्ता शब्बीर अहमद ने मार्क्सवाद को परिभाषित करते हुए प्रिमिटिव साम्यवाद से लेकर आधुनिक साम्यवाद की चर्चा की। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवाद व पूंजीवाद मुनाफे के आधार पर टिकी हुई व्यवस्था है। मुनाफे का अर्थ है कम से कम और अधिक से अधिक उत्पादन। विचार कीजिए यदि मेहनत जीरो हो जाए और उत्पादन शत-प्रतिशत हो जाए तो उत्पादक का उत्पाद कौन खरीदेगा। अंततः इसका इलाज मार्क्सवाद के पास ही है।

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