पांकी में सहायक शिक्षक जसवंत सिंह का असमय निधन, शिक्षा समुदाय में शोक की लहर

‘अनुकंपा पर नौकरी’ की उठी मांग, अंतिम संस्कार में गूंजे सरकार के प्रति नाराजगी के नारे

सच खबर पांकी (पलामू),
पांकी प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बुढ़ाबार कोनवाई में कार्यरत सहायक शिक्षक (पारा-टीचर) जसवंत सिंह का सोमवार को रांची में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। वे लगभग 40 वर्ष के थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर से गांव, विद्यालय परिवार और शिक्षकों के बीच गहरा शोक व्याप्त है। सोमवार शाम को उनका अंतिम संस्कार गांव में किया गया, जहां बड़े जनसमूह की उपस्थिति में ‘जसवंत सिंह अमर रहें’ और ‘झारखंड सरकार होश में आओ’ जैसे नारे गूंजते रहे।

पुत्रों ने दी मुखाग्नि

स्वर्गीय जसवंत सिंह को उनके दोनों पुत्रों – विद्याशंकर कुमार और वरदान कुमार ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं और पूरा माहौल भावुक हो गया।

‘अनुकंपा पर नौकरी’ की जोरदार मांग

अंतिम संस्कार के मौके पर पारा शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष विद्यासागर पांडे ने कहा, “सरकार पारा शिक्षकों के साथ वर्षों से सौतेला व्यवहार कर रही है। स्वर्गीय जसवंत सिंह के परिवार को अब सरकार से अनुकंपा नौकरी मिलनी चाहिए।”

वर्तमान अध्यक्ष सतीश सिंह ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से मांग की कि मृतक के पुत्र को अनुकंपा पर शिक्षक नियुक्त किया जाए, जिससे परिवार को जीवनयापन में सहायता मिल सके।

समाज के गणमान्य लोगों की उपस्थिति

अंतिम संस्कार में कई सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित थे। प्रमुख लोगों में:

  • मुखिया पति बृजदेव सिंह
  • समिति सदस्य लक्ष्मण सिंह
  • अरविंद सिंह, जगनारायण सिंह, दीप नारायण सिंह, दिनेश सिंह, अनित सिंह, शैलेन्द्र सिंह
  • सतीश मंडल, पप्पू सिंह, सुरेंद्र सिंह, अमितेश्वर मिश्रा, सुशील पांडे
  • तालकेश्वर सिंह, राकेश सिंह, सतीश सिंह, मोबीन अहमद, विजय सिंह
  • मोहन कुमार, संजय सिंह, जय सिंह, मुकेश सिंह, मानकी सिंह, हरिवंश सिंह
  • एवं बड़ी संख्या में शिक्षक समुदाय के लोग मौजूद रहे।

शिक्षक समाज में शोक और आक्रोश

स्वर्गीय जसवंत सिंह को एक समर्पित शिक्षक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में जाना जाता था। उनके असमय निधन से शिक्षक समाज में न सिर्फ गहरा शोक, बल्कि सरकार की नीतियों को लेकर नाराजगी भी देखी गई

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