बिजली विभाग की लापरवाही से तीन दिन अंधेरे में रहे ग्रामीण, खुद चंदा कर बहाल की आपूर्ति

मिस्त्री ने सहायता से किया इनकार, एसडीओ ने टालमटोल किया; जान जोखिम में डाल ग्रामीणों ने खुद बदला इंसुलेटर

सच खबर हुसैनाबाद हुसैनाबाद प्रखंड के काजरात नावाडीह सहित कई गांवों में तीन दिनों से बाधित बिजली आपूर्ति ग्रामीणों के खुद के प्रयास से बहाल हो सकी। बिजली विभाग की अनदेखी और कर्मियों की लापरवाही के चलते लोग अंधेरे में रहने को मजबूर थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवरी फिटर अंतर्गत लामार गांव और कड़मरी के बीच 11 पोल का इंसुलेटर खराब हो गया था, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने मंगलवार को हुसैनाबाद बिजली विभाग के एसडीओ रामप्रसाद महतो को दी। एसडीओ ने बताया कि संबंधित क्षेत्र की जिम्मेदारी बिजली मिस्त्री संतोष कुमार सिंह को सौंपी गई है और ग्रामीण चाहें तो उनसे संपर्क कर कार्य करवा सकते हैं या विभाग से “सो-डाउन” लेकर मरम्मत स्वयं करा सकते हैं।

ग्रामीणों ने जब मिस्त्री से संपर्क किया, तो उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि “मेरे पास कोई फोन न करे, विभाग ने मुझे कोई संपर्क नंबर नहीं दिया है।” ग्रामीणों के विरोध जताने पर उन्होंने कहा—”जिससे कहना है कह दीजिए, मुझे किसी से डर नहीं है।” इस मामले की शिकायत वरीय अधिकारी एसडीओ को दी गई, जिन्होंने लिखित शिकायत मिलने पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

थक-हारकर ग्रामीणों ने चंदा कर इंसुलेटर खरीदा और गुरुवार को दोपहर में किसी प्रकार दो फेज में बिजली आपूर्ति बहाल की।

हुसैनाबाद प्रखंड के देवरी फिटर से बड़ेपुर, बनियाडीह, बराही, दंगवार, बेलबिगहा पंचायत के धावाबार, लामार, कड़मरी, काजरात आदि गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। लेकिन अभी तक गांवों में एल.टी. पोल और तार नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीण अपने निजी खर्चे पर तार खरीदकर बिजली उपयोग कर रहे हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है। हर दो-चार दिन में तार टूटकर गिर जाता है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।

दंगवार से काजरात नावाडीह तक ग्यारह हजार वोल्ट के तार और पोल की स्थिति भी अत्यंत जर्जर है। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लचर व्यवस्था और जवाबदेही की कमी से आए दिन जान जोखिम में डालनी पड़ती है। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता खुद चंदा कर बिजली बहाल करती रहेगी, और कब विभाग जागेगा?

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