मेदिनीनगर, 23 जुलाई।
पलामू जिले में औषधि नियंत्रण प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर उठे विवाद के बीच औषधि निरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि औषधि अनुज्ञप्ति रद्द व निलंबन की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है। उन्होंने कहा कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, नौडीहा बाजार स्थित “मेसर्स रौशन ड्रग स्टोर” की अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई है, जबकि डाल्टनगंज के पांच थोक विक्रेताओं की औषधि अनुज्ञप्ति अस्थायी रूप से 60 दिनों के लिए निलंबित की गई है।
फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में निषिद्ध श्रेणी की दवाएं पाई गईं
औषधि निरीक्षक के अनुसार, रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की नियुक्ति के बिना किसी प्रतिष्ठान को एससीएच, सी, सी-1, एच, एच-1, जी और एक्स श्रेणी की औषधियों के क्रय-विक्रय का अधिकार नहीं होता है। लेकिन मेसर्स रौशन ड्रग स्टोर में छापेमारी के दौरान इस श्रेणी की औषधियाँ अनुचित रूप से संचयित पाई गईं, जबकि उनके पास इस श्रेणी की औषधि विक्रय के लिए वैध अनुज्ञप्ति नहीं थी।
निरीक्षण के दौरान प्रपत्र-16 के अंतर्गत औषधियों एवं संबंधित क्रय-विपत्रों को जब्त किया गया। उक्त अनियमितता के आधार पर संस्थान की अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई।
इन थोक विक्रेताओं की अनुज्ञप्ति 60 दिन के लिए निलंबित
औषधि निरीक्षक ने बताया कि पांच थोक विक्रेताओं द्वारा बिना वैध औषधि अनुज्ञप्ति के संबंधित स्टोर को आपूर्ति की गई थी, जो कि अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इस आधार पर इन संस्थानों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और अनुज्ञप्तियाँ अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं।
निलंबित संस्थानों की सूची इस प्रकार है:
- अमित मेडिकल एजेंसी
- श्री भवानी फार्मा
- मेसर्स अन्विका डिस्ट्रीब्यूटर
- मेसर्स सिद्धार्थ मेडिकल एजेंसी
- मेसर्स सुमित्रा मेडिकल एजेंसी
फेडरेशन के विरोध को बताया अनुचित
औषधि निरीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि 17 जुलाई को समाचार पत्रों में छपी खबर तथा पलामू केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन द्वारा कार्यालय में किए गए विरोध-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के पीछे संस्थानों के विरुद्ध की गई नियमित वैधानिक कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि “यह धरना-प्रदर्शन औचित्यहीन और असंवैधानिक है, क्योंकि कार्रवाई अधिनियम के तहत प्रदत्त अधिकारों के अनुसार की गई है।”
अपील का रास्ता खुला
औषधि निरीक्षक ने कहा कि यदि कोई संस्थान कार्रवाई से असंतुष्ट है तो वह स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के समक्ष अपील दायर कर सकता है, जो इसके लिए अधिकृत अपीलीय प्राधिकारी हैं।
