100 दिन के कार्यकाल में कर्मचारियों को भूल गए कुलपति महोदय

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ अन्याय, वेतन और बहाली की बाट जोहते कर्मी

मेदिनीनगर (पलामू)।
वीर शहीदों की स्मृति में स्थापित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय एक समय उच्च शिक्षा की आकांक्षाओं का केंद्र था, लेकिन आज यह संस्थान प्रशासनिक अराजकता, संवेदनहीनता और नैतिक पतन का उदाहरण बनता जा रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव शैलेश कुमार मिश्रा और आउटसोर्सिंग एजेंसी ASK सिक्योरिटी सर्विस के कथित गठजोड़ के कारण सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बिना सूचना के निष्कासित कर दिया गया, जबकि संबंधित कंपनी का टेंडर दिसंबर 2023 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद जनवरी 2024 से सितंबर 2024 तक इन कर्मचारियों से कार्य लिया गया और 23 सितंबर 2024 को अचानक सेवा समाप्त कर दी गई।

कर्मचारियों का आरोप है कि इस संपूर्ण घटनाक्रम में कंपनी एवं विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत रही। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ब्लैकलिस्टेड कंपनी को कथित रूप से नया टेंडर भी प्रदान किया गया, जबकि राजभवन से 7 मई 2024 को पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया का निर्देश पहले ही जारी हो चुका था।

इन घटनाओं से कर्मचारी वर्ग मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट चुका है। पिछले 2 वर्षों से वेतन भुगतान और पुनः बहाली की उम्मीद लिए बैठे इन कर्मचारियों के लिए यह संस्थान अब सिर्फ एक प्रतीक बनकर रह गया है — भरोसे की टूटन और मानवता की गिरावट का प्रतीक

नव नियुक्त कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने अपने कार्यभार ग्रहण के शुरुआती दिनों में पांच माह का लंबित वेतन 15 दिन में भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधूरा है।

यह केवल एक वेतन विवाद नहीं है, यह शिक्षा के मंदिर में हो रहे नैतिक पतन और मानवीय संवेदना के ह्रास का जीता-जागता उदाहरण है।

आवेदन महामहिम राज्यपाल महोदय से

माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल महोदय से निवेदन है कि इस न्यायिक और नैतिक मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान दिलाया जाए और पुनः कार्य पर बहाली की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जाए।

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