सावित्री देवी बनीं देवरिया की प्रेरणास्रोत, घरेलू महिला से बनीं सफल उद्यमी
रामगढ़, देवरिया गांव की सावित्री देवी आज न केवल अपने गाँव बल्कि पूरे रामगढ़ ज़िले में महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। एक समय था जब उनका परिवार आर्थिक अस्थिरता, सीमित अवसरों और ऊँचे ब्याज दरों की जकड़ में फँसा हुआ था। आज वही सावित्री देवी आत्मनिर्भरता की मिसाल हैं, जो महिला सशक्तिकरण की कहानी को जी रही हैं।
शुरुआती संघर्ष: सीमित संसाधन, बड़े सपने
सावित्री देवी एक सामान्य घरेलू महिला थीं। उनके पति कभी मजदूरी तो कभी ड्राइविंग कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। खर्च जैसे-तैसे चलता था, लेकिन भविष्य के लिए कोई स्पष्ट राह नहीं थी। न पक्का मकान था, न ही कोई नियमित आय। स्थानीय साहूकार 10% मासिक ब्याज पर ऋण देते थे, जिससे स्वरोजगार की कल्पना भी असंभव थी।
2016 में मिला नया अवसर: समूह से जुड़ाव बना आधार
NRLM अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की पहल से सावित्री देवी ‘देवी महिला समूह’ की सदस्य बनीं। उन्हें पहले बुक कीपर (BK) और फिर मास्टर बुक कीपर (MBK) की भूमिका मिली। प्रशिक्षण और समूह की नियमित बैठकों से उन्होंने वित्तीय समझ और आत्मविश्वास विकसित किया।
“समूह से जुड़कर मुझे नई दिशा मिली। मैंने सीखा कि बचत, ऋण और आत्मनिर्भरता क्या होती है।” – सावित्री देवी
किराना से चिकन सप्लाई तक: कारोबार का विस्तार
सावित्री ने समूह से ₹10,000 का पहला ऋण लेकर किराना दुकान शुरू की। जल्द ही ₹1.5 लाख का बैंक ऋण लेकर चिकन सप्लाई व्यवसाय में भी कदम रखा। उनके पति ने इस व्यवसाय को संभाला। अब दोनों कारोबार से हर महीने ₹10,000–₹15,000 की आय होती है।
आज सावित्री देवी की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक है और उनका परिवार अब पक्के मकान में रहता है।
बदलती पहचान: परिवार से पंचायत तक नेतृत्व
सावित्री अब स्थानीय मंचों पर महिला समूहों का नेतृत्व करती हैं। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान है। वह कहती हैं—
“अब मैं चाहती हूँ कि मेरे बच्चे उच्च शिक्षा लें और हम सम्मान के साथ जीवन जिएँ।”
राज्य स्तरीय मिसाल बनीं सावित्री
JSLPS की इस सफलता ने सावित्री देवी को ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का चेहरा बना दिया है। उनकी कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और वित्तीय साधन मिलें तो ग्रामीण महिलाएँ भी संगठित होकर विकास की धारा में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।