रांची। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालक लोगों को रसीद ही नहीं दे रहा है। इससे लोगों को पता नहीं चल रहा है कि उसे नियमानुसार छूट मिल रही है या नहीं.संचालक रिम्स से समझौते का उल्लंघन कर रहा है, वहीं उपभोक्ता कानूनों की भी अनदेखी कर रहा है। मरीजों को शक है कि उन्हें दवाओं पर छूट नहीं दी जा रही है और इसका खुलासा न हो इसलिए रसीद नहीं दी जा रही है। इधर, रसीद न देनी पड़े, इसलिए कभी कोई बहाना तो कभी कोई बहाना बनाया जा रहा है। रिम्स में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र यानी जेनेरिक दवाओं की व्यवस्था के लिए पिछले दिनों प्रबंधन ने टेंडर के आधार पर इसे निजी दवा एजेंसी को सौंप दिया। रिम्स प्रबंधन और जेनेरिक दवा दुकान संचालक के बीच हुए समझौते के अनुसार जेनेरिक दवाओं पर 7ः एक्स्ट्रा डिस्काउंट हर मरीज को देना है। इसे ऐसे समझें कि अगर किसी भी जेनेरिक दवा का डिस्काउंट के बाद दर 100 रुपया है तो संचालक को अतिरिक्त 7ः की छूट देते हुए 93 रुपये ही लेना है, लेकिन इस 7ः को बचाने के लिए रिम्स जनऔषधि केंद्र के संचालक ने एक तरकीब निकाल रखी है, वह है कभी भीड़ तो कभी प्रिंटर खराब होने या कभी कागज उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर कैशमेमो (रसीद) नहीं देना। अब जब मरीज के परिजन के पास कैशमेमो ही नहीं रहेगा तो उसे पता कैसे चलेगा कि उसे दवा पर 7ः एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिला है या नहीं.ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट के अनुसार भी हर दवा की बिक्री के साथ कैशमेमो जारी करना जरूरी है पर रिम्स में खुलेआम दवाओं पर अतिरिक्त डिस्काउंट 7ः बचाने के लिए कैशमेमो नहीं दिया जा रहा है।