पटना। पटना विश्वविद्यालय के सैदपुर छात्रावास परिसर में मगध फाउंडेशन की एकदिवसीय कार्यकारिणी बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं मगध फाउंडेशन के अध्यक्ष केएन त्रिपाठी ने कहा कि मगध फाउंडेशन का गठन मगध साम्राज्यकालीन अखंड भारत की प्राचीन गरिमा को पुनर्स्थापित करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में विभिन्न राज्यों का पुनर्गठन होने के बावजूद मगध साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले विभिन्न राज्य आर्थिक, शैक्षणिक, तथा रोजगार की दृष्टि से आज भी पिछड़े हुए हैं। हमें जाति और धर्म की जगह गुणवत्ता एवं सक्षम नेतृत्व को आगे बढ़ाना है, जो सशक्त मगध और अखंड भारत की परिकल्पना को पूरा कर सके। वाराणसी उत्तर प्रदेश से पधारे डॉ. साकेत शुक्ला ने कहा कि मगध फाउंडेशन का प्रत्येक राज्य में राज्य स्तरीय बैठक की जायेगी एवं जिला कमेटी से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक कमेटी बनाई जाएगी। अंबिकापुर के रिफातुल्ला खान ने कहा कि मगध के लोग बहुत संघर्षशील होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और संस्कार कैसे बचेगी, इस पर भी कार्य करना होगा। पलामू के सीएस दुबे ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को मगध साम्राज्य की संस्कृति के अनुरूप गुण आधारित नेतृत्व सिखाया जाए, जो प्रखर राष्ट्रवाद से अभिभूत व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले हों। कार्यकारिणी बैठक में उपस्थित पटना के सुनील सिंह, श्रीमती रीता सिंह, डॉ. बबीता त्रिपाठी, पलामू के पांडे प्रदीप शर्मा, बबन पासवान, पंकज उपाध्याय, शिवहर के राकेश झा तथा वरिष्ठ पत्रकार सैयद इकबाल इमाम ने भी अपने विचार व्यक्त किये। पटना विश्वविद्यालय के छात्र नेता शाश्वत शेखर ने कहा कि मगध फाउंडेशन की छात्र इकाई का भी गठन किया जाएगा। सभा में उपस्थित सैकड़ों लोगों एवं छात्रों ने मगध क्षेत्र की अखंड भारत के अंतर्गत प्राचीन गरिमा स्थापित करने के लिए संकल्प लिया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मगध फाउंडेशन के महासचिव डॉ अजय ओझा ने कहा कि अति शीघ्र मगध फाउंडेशन एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन करेगा ताकि फाउंडेशन के विचारों का प्रचार प्रसार जन जन तक पंहुचाया जा सके।