झारखंड में पंचायत चुनाव कराने की अनुमति, चार चरणों में होंगे मतदान

रांची। बहुत इंतजार और विवाद के बाद झारखंड में पंचायत चुनाव को लेकर आखिरकार सारी अटकलें शनिवार को समाप्त हो गईं। राजभवन ने राज्य में पंचायत चुनाव कराने को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। झारखंड राज्यपाल रमेश बैस की अनुमति के बाद राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत निकायों के तहत ग्राम पंचायत सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन होगा। चुनाव कुल 4 चरणों में होंगे। इसके लिए आगामी 14 मई, 19 मई, 24 मई एवं 27 मई, 2022 की तिथि निर्धारित की गई है। राज्य में कुल 4345 ग्राम पंचायतों में 53479 सदस्यों के निर्वाचन के लिए वोटिंग होगी। वहीं 4345 मुखिया, 5341 पंचायत समिति सदस्यों तथा जिला परिषद के 536 सदस्यों के लिए चुनाव होगा। यह चुनाव बैलेट पेपर से चुनाव होगा।पहले चरण में 1127 ग्राम पंचायतों, दूसरे चरण में 872, तीसरे चरण में 1047 तथा चौथे चरण में 1299 ग्राम पंचायतों में चुनाव होगा। राज्य निर्वाचन आयोग आज शाम साढ़े पांच बजे चुनाव की घोषणा करेगा। पंचायत क्षेत्र में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में लागू होंगी ये आचार संहिताः-ऐसी सभी योजनाएं, जो पहले से ही स्वीकृत हैं और जिन पर कार्य प्रगति में है, का कार्यान्वयन होता रहेगा। इसी प्रकार ऐसी सभी योजनाएं जो पहले से स्वीकृत हैं तथा जिनका कार्यान्वयन भी शुरु हो गया था किन्तु निधि के अभाव में योजना अपूर्ण है और उसके लिए अब निधि उपलब्ध हो गयी है, उन सभी योजनाओं का कार्यान्वयन प्रारम्भ किया जा सकता है। केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में कोई रोक नहीं रहेगी। ऐसी केंद्रीय योजनाएं जिनके लिए केंद्र से वित्तीय सहायता पूर्ण रुप से या आंशिक रुप से प्राप्त होती है, और जिनका कार्यान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाना है उन पर भी कोई पाबंदी नहीं रहेगी। राष्ट्रीय उच्च पथ एवं राज्य के मुख्य पथों पर कार्य कराने में कोई रोक नहीं रहेगी। इंदिरा आवास योजना के कार्यान्वयन तथा राज्य प्रायोजित अन्य योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी कोई रोक नहीं रहेगी। मनरेगा के अन्तर्गत पूर्व से चल रही योजनाओं के कार्यान्वयन पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी।अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं, राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं आदि से स्वीकृत वित्तीय सहायता के आधार पर योजनाओं की स्वीकृति तथा उनके कार्यान्वयन पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत नई योजनाओं का कार्यान्वयन (पंचायत क्षेत्रों को छोड़कर) प्रारंभ किया जा सकता है। आपात योजनाएं जैसे बाढ़ निरोधक योजनाओं, सूखा अथवा अभावग्रस्त क्षेत्र से संबंधित योजनाओं आदि को पंचायत निर्वाचन की अवधि में प्रारंभ करने में कोई पाबंदी नहीं रहेगी।सांसद एवं विधायक निधि से स्वीकृत ऐसी योजनाएं जिनका कार्यान्वयन चल रहा हो, पर रोक नहीं रहेगी। नई विकास योजनाओं से संबंधित निविदा आमंत्रित करने या उसके निस्तारण पर पाबंदी रहेगी।पूर्व से स्वीकृत एवं क्रियान्वित हो रही योजनाओं को छोड़कर, ऐसी स्थानीय योजनाएं जिनका कार्यान्वयन पंचायत द्वारा किया जाता है उन पर पाबंदी रहेगी। किसी भी परिस्थिति में किसी चालू योजना का प्रारम्भ करने हेतु किसी प्रकार का अनुष्ठानिक कार्य, जैसे शिलान्यास आदि नहीं किया जाएगा। सरकार द्वारा उपर्युक्त दिशा-निर्देशों के अधीन यदि किसी योजना की स्वीकृति दी जाती है तो उसकी सूचना प्रकाशित नहीं की जाएगी। राज्य में विकास से संबंधित कार्यकलापों की प्रगति को दर्शाते हुए किसी प्रकार का इश्तेहार या विज्ञापनों का प्रसारण समाचार पत्रों या रेडियो-टेलीविजन आदि के माध्यम से नहीं किया जाएगा। इन टेंडरों पर नहीं रहेगी रोकः-भारतीय खाद्य निगम-राज्य खाद्य निगम द्वारा अनाज की ढुलाई, हथालन से संबंधित निविदा। पुलों पर शुल्क वसुलने हेतु निविदा जेल-अस्पतालों आदि के लिए खाद्य आपूर्ति, दवा आपूर्ति एवं अन्य औजार आपूर्ति हेतु निविदा, पुलिस, चौकीदार, दफादार आदि के लिए वर्दी एवं अन्य सामग्री हेतु निविदा,कार्यालय के लिए लेखन सामग्री एवं अन्य सामग्री हेतु निविदा,मतपत्र एवं अन्य प्रपत्रों की छपाई तथा आपूर्ति हेतु निविदा,बाजार, बस पड़ाव, तालाब, बगीचा, घाट, मेला, पशु मेला एवं अन्य सैरातों की बन्दोबस्ती,शहरी विकास योजनाओं एवं अन्य कार्यक्रम में आदर्श आचार संहिता प्रभावी नहीं होगी।
इन कार्यों पर भी नहीं रहेगी रोकः-मतदानकर्मी एवं सुरक्षा बलों के आवागमन हेतु सड़कों की मरम्मति, सरकारी विद्यालय या अन्य सरकारी भवन की अपरिहार्य मरम्मति, बाढ़ से बचाव के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा कोई आपात कार्य, सभी विभागों द्वारा आपात कार्य,पेयजल से संबंधित योजनाएं। राज्य सरकार यदि कुछ क्षेत्रों को या पूरे क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करती है तो उस क्षेत्र की परिधि के अंतर्गत सहायता कार्य से संबंधित नियम लागू रहेगा। सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए किए गये निम्नांकित उपायों पर आदर्श आचार संहिता का प्रभाव नहीं होगापेयजल कूप का निर्माण, डगवेल और बोरवेल का निर्माण, निर्धारित दर पर खाद्यान्न एवं पशु चारा की आपूर्ति, रोजगार सृजन हेतु मजदूरी पर किया गया व्यय, इंटिग्रेटेड वाटर से किए गए प्रोग्राम। आदर्श आचार संहिता की परिधि से बाहर रहेंगेः-दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंगों का वितरण,पूर्व से स्वीकृत सामाजिक सुरक्षा तथा वृद्धावस्था पेंशन,छात्रों के बीच छात्रवृत्ति, पुस्तक, पोशाक, साईकिल आदि का वितरण।छात्रावासों के लिए खाद्य-सामग्री एवं अन्य उपस्कर की आपूर्ति आदि।

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