पलामू एसपी ने तत्परता से टेंडर को लेकर ठेकेदारों की झड़प को रोका, असमाजिक तत्वोां को खदेड़ा, जवानों को लगाई फटकार

सच खबर, मेदिनीनगरः पलामू पुलिस पर आम जनता का भरोसा इतना बढ़ गया है की अब आम जनता भी अपनी कानून व्यवस्था संबंधित परेशानियों सीधे पुलिस से संपर्क कर समाधान कराने लगी है और पुलिस भी अपने कार्य प्रणाली और पूरी क्षमता से सीधे जनता से संपर्क कर उनकी मदद करने लगी है। इसका एक उदाहरण कचहरी परिसर में देखने को मिला। जहां जिला परिषद कार्यालय में उप -स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए टेंडर डेल जा रहे थे। यह एक- एक उप स्वास्थ्य केंद्र 55 लाख का सरकार ने विज्ञप्ति निकाली थी। इस टेंडर को भरने के लिए जिले भर के कई छोटे-बड़े ठेकेदार के अलावा कई दबंग ठेकेदार भी आए हुए थे, जिसमें, एक रांची का ठेकेदार भी टेंडर डालने जिला परिषद कार्यालय में प्रवेश किया। लेकिन, वहां पहले से ही मौजूद जिले के ही एक दो दबंग ठेकेदार अपने साथियों की मदद से टेंडर भरने से रोकने के लिए उस ठेकेदार को मना करने लगे फिर दोनों तरफ से जोर -आजमाइश होने लगी। धीरे-धीरे स्थिति तनावपूर्ण होने लगी, तभी रांची का वह ठेकेदार किसी अन्य आदमी से पलामू एसपी का मोबाइल नंबर मांग कर सीधे पुलिस कप्तान को फोन लगता है और यहां की सारी स्थिति से उन्हें अवगत करा देता है। पुलिस कप्तान चंदन कुमार सिन्हा ने भी स्थिति की नजाकत को समझते हुए तत्काल दल बल के साथ जिला परिषद कार्यालय में पहुंच गए। उन्हें आते देखकर कई ठेकेदार तो वहां से रफूचक्कर हो गए । पुलिस कप्तान श्री सिन्हा भी कहां मानने वाले थे। उन्होंने पुलिस जवानों को उन असामाजिक तत्वों और ठेकेदारों के पीछे दौड़ाया और उन सभी को अपने पास बुलाकर पूछताछ कर जानकारी लेनी शुरू कर दी। उनसे पूछा गया कि वह कचहरी परिसर में आज क्यों आए हैं। तब कुछ ठेकेदारों ने पुलिस कप्तान को बताया कि वे टेंडर डालने आए हैं ,तब एसपी ने उन्हें हिदायत देते हुए कहा कि आप सब तत्काल टेंडर डाले और यहां से चले जाएं। इसके बाद उन्होंने अपने जवानों से उन सभी लोगों का वीडियो बनवाया और कहा कि इस पर जांच की जाएगी की कौन-कौन व्यक्ति टेंडर डालने आए हैं और कौन अनावश्यक इस प्रक्रिया में शामिल होने आए हैं। पुलिस कप्तान ने पहले से ड्यूटी दे रहे शहर थाना के जवानों को फटकार भी लगाई और कहा कि ड्यूटी मुस्तैदी और ईमानदारी दोनों से होनी चाहिए। जरा सी भी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद पुलिस कप्तान ने इस सारी घटना की सूचना देने वाले ठेकेदार को फोन लगाकर उन सभी व्यक्तियों का पहचान करने के लिए बुलाया जो टेंडर रोकने की प्रक्रिया में बाधक बन रहे थे और पुलिस प्रशासन से कहा कि पहचान के बाद उन सभी असामाजिक तत्वों पर मामला दर्ज किया जायेगा।

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