सच खबर, मेदिनीनगरः प्रोफेसर मैनेजर पांडे जीवन पर्यंत निरंतर रचना कर्म का कार्य करते रहे। उन्होंने रचना कर्म के दौरान कभी समझौता नहीं किया। अपने साहित्य सृजन के दौरान उन्होंने जनवाद और जनवादी चेतना को आगे बढ़ाने और समृद्ध करने में अपनी पूरी जिंदगी खपा दी। प्रोफेसर मैनेजर पांडे विशेष रुप से आलोचना की विधा को अपनाया। आलोचना एक ऐसी विधा है जो सृजनकर्ताओं को हतोत्साहित भी करता है और उत्साहवर्धन भी करता है। मैनेजर पांडे की आलोचना लेखकों और कवियों को और भी लिखने के लिए प्रेरित करता रहा और उनकी सृजनात्मकता को एक दिशा प्रदान की। मैनेजर पांडे एक ऐसे आलोचक थे जिन्होंने भक्ति काल और रीतिकाल के साहित्य में भी चेतना के तत्व ढूंढ निकाले। उन्होंने जिन साहित्य की रचना की है उनमें प्रमुख है शब्द और कर्म, साहित्य और इतिहास दृष्टि, मैं भी अपने मुंह में जबान रखता हूं। उक्त बातें प्रोफेसर मैनेजर पांडेय के निधन पर इप्टा, प्रगतिशील लेखक संघ और जसम की पलामू इकाई द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान पंकज श्रीवास्तव, केडी सिंह, नंदलाल सिंह, शब्बीर अहमद, प्रसिद्ध राम, लल्लन प्रजापति, श्याम नारायण सिंह ने कहा और श्रद्धांजलि अर्पित किया। श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रेडमा स्थिति इप्टा कार्यालय में किया गया था। सभा की अध्यक्षता प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव एवं संचालन इप्टा के रंगकर्मी प्रेम प्रकाश ने की। कार्यक्रम के अंत में इप्टा के जिला सचिव रविशंकर ने प्रोफेसर मैनेजर पांडे के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभी साथियों को 1 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आग्रह किया। उपस्थित तमाम लोगों ने खड़े होकर प्रोफेसर मैनेजर पांडे के प्रति मौन श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर इप्टा, प्रगतिशील लेखक संघ और जसम, अखिल भारतीय किसान सभा, एआईएसएफ, आइसा एवं भूमि न्यूज़ चैनल के प्रतिनिधि के रूप में अजीत ठाकुर, शशि पांडे, घनश्याम कुमार, अमित कुमार, भोला, संजू कुमार, अविनाश रंजन, गौतम कुमार दांगी, कंचन कुमार, ममता कुमारी, ओ एन तिवारी, गुड्डू कुमार, अभय सिंह, सुशील कुमार सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।